11 अप्रैल 2015 - 19:30
बोलिविया के राष्ट्रपति ने लैटिन अमरीका में अमरीकी दूतावास को सैन्य विद्रोह का बताया।

बोलिविया के राष्ट्रपति ने लैटिन अमरीका में अमरीकी दूतावास को सैन्य विद्रोह के गढ़ की संज्ञा दी है। उन्होंने कहा कि जहां अमरीकी दूतावास है वहां सैन्य विद्रोह भी हुआ है।

अबनाः बोलिविया के राष्ट्रपति ने लैटिन अमरीका में अमरीकी दूतावास को सैन्य विद्रोह के गढ़ की संज्ञा दी है। उन्होंने कहा कि जहां अमरीकी दूतावास है वहां सैन्य विद्रोह भी हुआ है।
टेलसर टेलीविजन नेटवर्क के अनुसार बोलिविया के राष्ट्रपति इवो मोरालेस ने पीपल्ज़ समिट के उद्घाटन भाषण में, जो पनामा में 35 लैटिन अमरीकी देशों के सातवें शिखर सम्मेलन ओएएस के साथ-साथ चल रहा है कहा कि अमरीका, लैटिन अमरीका की प्रगतिशील सरकारों को सैन्य विद्रोह के माध्यम से अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि वाशिंग्टन ने अपने दूतावास के ज़रिए लैटिन अमरीका में प्रजातांत्रिक प्रक्रिया को नुक़सान पहुंचाने की कोशिशें की हैं।
बोलिविया के राष्ट्रपति इवो मोरालेस ने जनवरी 2006 के इस देश के राष्ट्रपति पद के चुनाव को मिसाल के तौर पर पेश किया और कहा कि दक्षिणपंथियों, विपक्ष और अमरीकी राजदूत ने हमेशा की तरह प्रजातांत्रिक प्रक्रिया को कमज़ोर करने के लिए षड्यंत्र रचे हैं। उन्होंने कहा कि सुधार प्रक्रिया के दौरान अमरीकी राजदूत ने विरोधियों तथा नियो-उदारवाद के बचे खुचे तत्वों के साथ बैठकें कीं जिसके परिणाम स्वरूप हम अमरीकी राजदूत को निकालने पर मजबूर हुए।  बोलिविया के राष्ट्रपति ने कहा कि अमरीकी दूतावास के बिना हम राजनैतिक और प्रजातांत्रिक दृष्टि से विगत की तुलना में बेहतर हैं।
बोलिविया के राष्ट्रपति इवो मोरालेस ने अपने भाषण में बल दिया कि नियो उदारवाद की लैटिन अमरीकी और कैरिबियाई देशों में दाल नहीं गलने वाली है। उनहोंने इसी प्रकार कहा कि लैटिन अमरीकी देशों के भीतरी मामलों में हस्तक्षेप का दौर ख़त्म हो गया है।
ज्ञात रहे अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शुक्रवार को पनामा में 35 लैटिन अमरीकी देशों के संगठन ओएएस के सातवें शिखर सम्मेलन में भाषण में कहा कि अब अमरीका, लैटिन अमरीकी देशों के मामले में अपनी मर्ज़ी नहीं थोप सकता क्योंकि अब इसका दौर ख़त्म हो चुका है। यह वे दिन थे जब हमारी योजना इस अवधारणा पर आधारित थी कि अमरीका ख़ुद को न्यायिक कार्यवाही के दायरे से बाहर रखकर लैटिन अमरीकी देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है किन्तु अब वह दौर ख़त्म हो गया है।